Delimitation Bill क्या है?

QUICK READ
  1. The Delimitation Bill aims to redraw electoral boundaries and increase Lok Sabha seats significantly, from 543 to 816-850, based on the 2011 census.
  2. It also plans to increase state assembly seats and is linked to the implementation of 33% women's reservation in legislatures.
  3. Southern states oppose the bill, expressing concerns that their political representation will diminish compared to northern states due to their successful population control measures.

कल्पना कीजिए, लोकसभा या विधानसभा चुनाव में हर इलाके (constituency) में लगभग बराबर लोगों की संख्या होनी चाहिए। अगर किसी राज्य की आबादी बहुत बढ़ गई है, तो उसे ज्यादा सांसद या विधायक मिलने चाहिए। Delimitation (परिसीमन) ठीक यही काम करता है – चुनावी क्षेत्रों की सीमाएं नई आबादी के हिसाब से फिर से तय करना

भारत में यह काम एक स्वतंत्र Delimitation Commission करती है, जो जनगणना (census) के आंकड़ों पर आधारित होती है। इसका मकसद है कि हर सांसद या विधायक लगभग एक समान संख्या के लोगों का प्रतिनिधित्व करे।

पहले क्या था?

  • आखिरी बड़ा परिसीमन 2002 में 2001 की जनगणना पर हुआ था।
  • उसके बाद 1971 की जनगणना को फ्रीज कर दिया गया था, ताकि परिवार नियोजन करने वाले राज्यों को सजा न मिले (क्योंकि ज्यादा बच्चे वाले राज्यों को ज्यादा सीटें मिलतीं)।
  • अब 2026 के बाद नया परिसीमन होना था, लेकिन सरकार इसे पहले लाना चाहती है।

Delimitation Bill 2026 क्या कहता है? (ताजा अपडेट)

अप्रैल 2026 में सरकार ने संसद के स्पेशल सेशन में तीन बिल पेश किए:

  • Constitution (131st Amendment) Bill
  • Delimitation Bill, 2026
  • Union Territories Laws (Amendment) Bill

मुख्य बातें:

  • लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर लगभग 816-850 करने का प्लान है (करीब 50% बढ़ोतरी)।
  • नई सीटें 2011 की जनगणना के आधार पर तय होंगी।
  • राज्य विधानसभाओं की सीटें भी बढ़ेंगी।
  • इससे महिला आरक्षण (33% सीटें महिलाओं के लिए) को लागू करने का रास्ता साफ होगा।

सरकार कह रही है कि सभी राज्यों की सीटों में समान अनुपात से बढ़ोतरी होगी, ताकि कोई राज्य नुकसान में न आए। लेकिन विपक्ष और खासकर दक्षिण भारतीय राज्य (तमिलनाडु, केरल, आंध्र, कर्नाटक आदि) चिंतित हैं। उनका कहना है कि उत्तर के राज्यों (यूपी, बिहार आदि) की आबादी ज्यादा बढ़ी है, इसलिए उन्हें ज्यादा फायदा होगा और दक्षिण की राजनीतिक ताकत कम हो सकती है – भले ही दक्षिण ने परिवार नियोजन बेहतर किया हो और आर्थिक योगदान ज्यादा हो।

सरल उदाहरण से समझें

मान लीजिए एक छोटा राज्य जहां 10 लाख लोग हैं, उसे 1 सीट मिली। अब आबादी 20 लाख हो गई, तो उसे 2 सीटें मिलनी चाहिए। Delimitation यही बैलेंस करता है। लेकिन अगर पूरे देश में सीटें बढ़ाई जाएं, तो बड़े आबादी वाले राज्य ज्यादा पावरफुल हो जाते हैं।

क्यों हो रहा है विवाद?

  • दक्षिण vs उत्तर: दक्षिण के नेता कह रहे हैं कि जनसंख्या नियंत्रण करने का “सजा” न मिले।
  • महिला आरक्षण: बिल के साथ जुड़ा है, इसलिए जल्दी लागू करने की कोशिश।
  • कुछ लोग कहते हैं कि 2031 की नई जनगणना के बाद करना चाहिए, 2011 पुराना हो गया।

अभी बिल पर संसद में चर्चा चल रही है। पास होने के लिए खास बहुमत (दो-तिहाई) की जरूरत पड़ सकती है, इसलिए सभी पार्टियों की राय महत्वपूर्ण है।

संक्षेप में, Delimitation Bill भारत की लोकतंत्र की “नक्शा” फिर से बनाने का प्रयास है – ज्यादा सीटें, नई सीमाएं, और महिलाओं को ज्यादा जगह। लेकिन इससे राजनीतिक संतुलन कैसे बदलेगा, यह आने वाले समय में तय होगा।

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